वर्ष के 12 महीनों की संदर्भ तालिका — नाम, दिन, हिंदू मास, ऋतु और तिमाही।
| क्रम | महीना | संक्षेप | हिंदू मास | दिन | ऋतु | तिमाही |
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12 महीनों के बारे में
हिंदी और अंग्रेज़ी में महीनों के नाम
- जनवरी (January) — रोमन देवता Janus से, नए आरम्भ का प्रतीक।
- फ़रवरी (February) — लैटिन Februarius (शुद्धिकरण उत्सव) से।
- मार्च (March) — युद्ध-देवता Mars से। प्राचीन रोमन कैलेंडर का पहला महीना।
- अप्रैल (April) — लैटिन aperire (खुलना) से, वसंत की कलियों का संकेत।
- मई (May) — देवी Maia से, वृद्धि और उर्वरता की प्रतीक।
- जून (June) — रोमन देवी Juno से।
- जुलाई (July) — पहले Quintilis (पाँचवाँ) था; 44 ईसा पूर्व में Julius Caesar के नाम पर रखा गया।
- अगस्त (August) — पहले Sextilis (छठा) था; सम्राट Augustus के नाम पर रखा गया।
- सितंबर (September) — septem (सात) से।
- अक्टूबर (October) — octo (आठ) से।
- नवंबर (November) — novem (नौ) से।
- दिसंबर (December) — decem (दस) से। नाम और स्थिति का अंतर पुराने 10-महीने वाले रोमन कैलेंडर की निशानी है।
हिंदू पंचांग के 12 महीने (विक्रम संवत)
हिंदू पंचांग चंद्र-सौर (lunisolar) है — महीने चंद्र-चक्र के अनुसार चलते हैं और अधिक मास से सौर वर्ष के साथ संतुलन बना रहता है। ग्रेगोरियन वर्ष 2025-26 लगभग विक्रम संवत 2082 के बराबर है।
- चैत्र (Chaitra) — मार्च-अप्रैल, हिंदू नववर्ष की शुरुआत
- वैशाख (Vaishakha) — अप्रैल-मई
- ज्येष्ठ (Jyeshtha) — मई-जून
- आषाढ़ (Ashadha) — जून-जुलाई
- श्रावण (Shravana) — जुलाई-अगस्त, मानसून और शिव-पूजा का माह
- भाद्रपद (Bhadrapada) — अगस्त-सितंबर
- आश्विन (Ashwin) — सितंबर-अक्टूबर, नवरात्रि और दशहरा
- कार्तिक (Kartika) — अक्टूबर-नवंबर, दिवाली का महीना
- मार्गशीर्ष (Margashirsha) — नवंबर-दिसंबर
- पौष (Pausha) — दिसंबर-जनवरी
- माघ (Magha) — जनवरी-फरवरी, माघ मेला
- फाल्गुन (Phalguna) — फरवरी-मार्च, होली का महीना
भारत की 6 ऋतुएँ (षड् ऋतु)
भारतीय परंपरा में वर्ष को 6 ऋतुओं में बाँटा गया है, हर ऋतु लगभग 2 महीने की होती है:
- वसंत (Vasant) — फरवरी-मार्च, फूलों का मौसम, होली का समय
- ग्रीष्म (Grishma) — अप्रैल-जून, गर्मी का चरम
- वर्षा (Varsha) — जुलाई-अगस्त, मानसून — कृषि का प्राण
- शरद (Sharad) — सितंबर-अक्टूबर, स्वच्छ आकाश, नवरात्रि
- हेमंत (Hemant) — नवंबर-दिसंबर, हल्की सर्दी
- शिशिर (Shishir) — जनवरी-फरवरी, कड़ी सर्दी और ओस
यह वर्गीकरण उत्तर भारत के मौसम पर आधारित है; दक्षिण भारत में मानसून के दो दौर होते हैं (दक्षिण-पश्चिम और पूर्वोत्तर)।
फ़रवरी में 28 या 29 दिन क्यों होते हैं
प्राचीन रोमन कैलेंडर में केवल 10 महीने थे और मार्च से वर्ष शुरू होता था; सर्दियों के दिन गिने ही नहीं जाते थे। लगभग 713 ईसा पूर्व में राजा Numa Pompilius ने जनवरी और फ़रवरी जोड़े। रोमन सम-संख्या को अशुभ मानते थे, इसलिए अधिकांश महीनों में 29 या 31 दिन रखे गए — पर गणित के लिए एक छोटा महीना चाहिए था, सो फ़रवरी को 28 दिन मिले। 45 ईसा पूर्व में Julius Caesar ने सुधार किया और 365-दिन का वर्ष बनाया, परंतु फ़रवरी को छोटा महीना ही रहने दिया जो हर 4 वर्ष में लीप-दिन सोखता है।
लीप वर्ष (Leap Year) का नियम
एक वर्ष लीप वर्ष होता है (फ़रवरी में 29 दिन) यदि:
- यह 4 से विभाज्य हो, और
- यह 100 से विभाज्य न हो, लेकिन
- यदि यह 400 से भी विभाज्य हो तो लीप वर्ष होगा।
उदाहरण: 2024 → लीप (÷4, ÷100 नहीं)। 2100 → सामान्य (÷100 पर ÷400 नहीं)। 2000 → लीप (÷400)। यह नियम कैलेंडर वर्ष को सौर वर्ष (~365.2422 दिन) के साथ जोड़े रखता है — 3000 वर्ष में एक दिन से कम भटकाव।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
एक वर्ष में 12 महीने क्यों होते हैं?
12 महीनों का विभाजन चंद्र-चक्र से आया है: एक चंद्र मास लगभग 29.5 दिन का होता है, और 12 ऐसे चक्र (~354 दिन) सौर वर्ष के लगभग बराबर होते हैं। रोमनों ने लगभग 700 ईसा पूर्व 12 की संख्या मानकीकृत की, और Julian तथा बाद में Gregorian सुधारों ने इसे बनाए रखते हुए 365-दिन के सौर वर्ष से मिलाया। संख्या 12 को 2, 3, 4 और 6 से सहज विभाजित किया जा सकता है, इसलिए यह तिमाही, छमाही और तिहाई के लिए सुविधाजनक है — 4 तिमाहियाँ × 3 महीने।
हर महीने में कितने दिन होते हैं?
- 31 दिन: जनवरी, मार्च, मई, जुलाई, अगस्त, अक्टूबर, दिसंबर (7 महीने)
- 30 दिन: अप्रैल, जून, सितंबर, नवंबर (4 महीने)
- 28 या 29 दिन: फ़रवरी (1 महीना — लीप वर्ष में 29)
याद रखने का तरीका — पोर (knuckle) विधि: मुट्ठी बंद करें, पोर वाले महीने 31-दिन के, गड्ढों वाले छोटे होते हैं। जनवरी पोर से शुरू करें, अगस्त फिर पोर से।
भारत में वित्तीय वर्ष और शैक्षिक सत्र कब शुरू होते हैं?
भारत में वित्तीय वर्ष (Financial Year) 1 अप्रैल से 31 मार्च तक चलता है, ग्रेगोरियन कैलेंडर वर्ष से अलग। उदाहरण: FY 2025-26 का अर्थ है 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026। CBSE, ICSE और अधिकांश राज्य बोर्डों का शैक्षणिक सत्र भी अप्रैल में शुरू होता है। तिमाहियाँ इसी के अनुरूप हैं: Q1 (अप्र-जून), Q2 (जुल-सित), Q3 (अक्टू-दिस), Q4 (जन-मार्च)। केंद्रीय बजट 1 फ़रवरी को पेश होता है ताकि नए FY से लागू हो सके।
कौन से महीने में कौन से प्रमुख भारतीय त्योहार आते हैं?
- जनवरी — मकर संक्रांति, पोंगल, गणतंत्र दिवस (26)
- फ़रवरी-मार्च — महाशिवरात्रि, होली
- अप्रैल — राम नवमी, बैसाखी, हनुमान जयंती, अंबेडकर जयंती
- मई — बुद्ध पूर्णिमा, अक्षय तृतीया
- जुलाई-अगस्त — गुरु पूर्णिमा, रक्षा बंधन, स्वतंत्रता दिवस (15 अग), जन्माष्टमी, ओणम
- सितंबर-अक्टूबर — गणेश चतुर्थी, नवरात्रि, दशहरा, गांधी जयंती (2 अक्टू)
- अक्टूबर-नवंबर — दिवाली, गोवर्धन पूजा, भाई दूज, छठ पूजा
- दिसंबर — क्रिसमस
- ईद चंद्र-कैलेंडर के अनुसार बदलती है (ईद-उल-फ़ितर और ईद-उल-अज़हा हर साल लगभग 11 दिन पहले आते हैं)।
तिमाही (Quarter) क्या है और महीनों में कैसे बँटी है?
तिमाही 3 महीनों का खंड है, वित्त, लेखा और रिपोर्टिंग में उपयोगी। कैलेंडर तिमाहियाँ:
- Q1: जनवरी, फ़रवरी, मार्च
- Q2: अप्रैल, मई, जून
- Q3: जुलाई, अगस्त, सितंबर
- Q4: अक्टूबर, नवंबर, दिसंबर
भारतीय वित्तीय वर्ष की तिमाहियाँ (अप्रैल-मार्च FY) इससे भिन्न हैं — वहाँ Q1 = अप्रैल-जून। यह तालिका कैलेंडर तिमाही दिखाती है।
भारतीय 6 ऋतुओं और पश्चिमी 4 मौसमों में क्या अंतर है?
पश्चिमी प्रणाली में 4 मौसम (वसंत, ग्रीष्म, शरद, हेमंत) होते हैं और सूर्य की धुरी के झुकाव के आधार पर परिभाषित होते हैं। भारतीय परंपरा में 6 ऋतुएँ हैं जो मानसून और स्थानीय जलवायु को विशेष महत्व देती हैं — विशेष रूप से वर्षा (मानसून, जुल-अग) जो भारतीय कृषि और संस्कृति की रीढ़ है। उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध के बीच मौसम उलटे होते हैं — जब दिल्ली में सर्दी होती है तब सिडनी में गर्मी। तालिका के ऊपर के बटनों से तीनों प्रणालियाँ देख सकते हैं।
यह तालिका ग्रेगोरियन कैलेंडर के 12 महीनों का पूरा संदर्भ देती है — हिंदी और अंग्रेज़ी नाम, संक्षिप्त रूप, दिनों की संख्या, समकालीन हिंदू पंचांग मास (विक्रम संवत), भारतीय 6 ऋतुएँ (वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत, शिशिर) और कैलेंडर तिमाहियाँ। ऋतु प्रणाली बदलने के लिए उत्तरी या दक्षिणी गोलार्ध भी चुन सकते हैं। उपयोग सरल है: कोई भी वर्ष दर्ज करें, स्वचालित रूप से लीप वर्ष की जाँच होगी और फ़रवरी के दिन (28 या 29) समायोजित होंगे। उदाहरण: वर्ष 2026 लिखने पर तालिका दिखाएगी कि फ़रवरी में 28 दिन हैं और विक्रम संवत 2082-2083 चल रहा है। दूसरा उदाहरण: वर्ष 2024 दर्ज करें — लीप वर्ष होने के कारण फ़रवरी 29 दिन की दिखेगी। वर्तमान महीना बटन से आज का माह स्वतः चिह्नित होता है, और कॉपी बटन से पूरी तालिका टेक्स्ट रूप में नकल की जा सकती है।